वेधशाला की दूरबीन आकाश के अनदेखे हिस्से की ओर मुड़ी। हाशिए के नोट जगह बनाने के लिए खिसक गए। जवाब के बजाय सवालिया निशान ज़्यादा ईमानदार लगा।
जीवंत कीमिया
दुनियाओं की धड़कन · जीवंत कीमिया
दुनियाओं की धड़कन की छोटी कहानियाँ और झलकियाँ।
भूला हुआ पंख-कलम पास की दवात की ओर लुढ़का। बिना हस्ताक्षर की एक किताब गर्म पन्नों के साथ पुस्तकालय पहुँची। वाचनालय ने बंद होने तक राज़ बचाए रखा।
किसी के नक्शा रखने के बाद अभियान का बस्ता हल्का लगने लगा। कदमों की आवाज़ अलाव की रोशनी के आखिरी घेरे के पार खो गई। एक और अनसुलझे सवाल के साथ शिविर शांत हो गया।
संग्रहालय के खाली प्रदर्शन-केस पर उँगली का ऐसा निशान उभरा मानो किसी ने सोचते हुए छोड़ा हो। प्रदर्शित वस्तु अपनी जगह रही, लेकिन उसका स्पष्टीकरण नहीं रहा। एक असामान्य रूप से साफ़ रूपरेखा के चारों ओर धूल बैठ गई।
पारदर्शी काँच के मनके ने गहरे रंगों की छाया डाली। नमूने को नाम देने से पहले काँचकार ने उसे फिर देखा। काम की मेज़ पर प्रकाश की एक पट्टी मुड़ गई।
एक छोटी नाव बिल्कुल स्थिर पानी पर डोल रही थी। सबसे पुरानी लकड़ी की रेलिंग पर नमक चमक रहा था। अनपेक्षित आगमन के लिए नाव लगाने की एक जगह खाली रखी गई।
संगीतकार ने पन्ने के ऊपर पेंसिल थामे रखी। स्वर-काँटे ने खाली कुर्सी की ओर गुनगुनाया। विराम को रचना का हिस्सा रहने दिया गया।
लालटेन ने ठंडे कोनों को कुछ पल के लिए सुनहरा बना दिया। बर्फ़ से घिरी चौकी जागी तो पाला अनजाने अक्षरों के आकार में जमा था। किसी ने सर्दियों से तुरंत अपना कारण बताने को नहीं कहा।
व्यापारी का तराज़ू हाथ से लिखे वादे की ओर झुक गया। पड़ोसी दुकानदार ने पार्सल लपेटना रोक दिया। कहानी पूरी सुने बिना सौदा नहीं हुआ।
एक मधुमक्खी बिना उतरने की जगह चुने आसपास मंडराती रही। पूरी तरह काँच से बने फूल पर ओस जमा हो गई। दिन का सबसे उपयोगी औज़ार धैर्य निकला।
खाली कार्यमेज़ पर पीतल का छोटा पहिया घूमने लगा। कार्यमेज़ ने एक धैर्यभरी चरमराहट से जवाब दिया। किसी ने इसे गलती कहने की जल्दबाज़ी नहीं की।
वेधशाला की दूरबीन आकाश के अनदेखे हिस्से की ओर मुड़ी। ठंडी चाय में भी हल्की चमक झलकी। सबसे साहसी व्याख्या पेंसिल से लिखी गई।
नक्शानवीस को जानी-पहचानी नदी के नक्शे में नया मोड़ मिला। साफ़ लिखे नोट ने सीधी रेखाओं पर भरोसा करने से सावधान किया। लिपटे नक्शे दूर की पत्तियों की तरह सरसराए।
लकड़ी के चम्मच ने खाली कटोरे में सर्पिल बनाया। रसोइए ने विधियों की किताब को भाप से दूर किया। विधि में सुधार के बजाय हाशिए पर टिप्पणी जुड़ी।
अभियान का कंपास एक बंद नोटबुक की ओर इशारा करने लगा। केतली की भाप ने एक घुमावदार रास्ते का आकार ले लिया। मार्ग पर एक टिप्पणी जुड़ गई: «देखने लायक»।
व्यापारी का तराज़ू हाथ से लिखे वादे की ओर झुक गया। एक सिक्का ठीक अपने मालिक की हथेली में लौट आया। कीमत पर बात हो सकती थी, खासकर दिलचस्प सवालों के बदले।
ठंडी हो रही रोटी ने पहाड़ के आकार की छाया डाली। भंडारघर का दरवाज़ा विनम्र चरमराहट के साथ खुला। रसोइए ने आश्चर्य को भी स्वीकार्य सामग्री माना।
एक छोटे जीवाश्म ने अपनी परछाईं सुबह की रोशनी की ओर मोड़ दी। काफ़ी खाली जगह छोड़कर एक नई पट्टी तैयार की गई। धूप की एक किरण पट्टी से ठीक पहले रुक गई।
एक बोतल बंदरगाह पहुँची, जिसके भीतर एक सूखी लहर थी। सबसे पुरानी लकड़ी की रेलिंग पर नमक चमक रहा था। बंदरगाह के अधिकारी ने रोजनामचे में पेंसिल से एक सवाल लिख दिया।
कार्यशाला के शिकंजे में ऐसी आकृति थी जिसे किसी ने रखा ही नहीं था। औज़ारों की छायाएँ उनके हत्थों से लंबी थीं। एक छोटे खाली डिब्बे पर «बाद के लिए» लिखा गया।