जीवंत कीमिया

दुनियाओं की धड़कन

ठंडी हो रही रोटी ने पहाड़ के आकार की छाया डाली। भंडारघर का दरवाज़ा विनम्र चरमराहट के साथ खुला। रसोइए ने आश्चर्य को भी स्वीकार्य सामग्री माना।

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