जीवंत कीमिया

दुनियाओं की धड़कन

कार्यशाला के शिकंजे में ऐसी आकृति थी जिसे किसी ने रखा ही नहीं था। औज़ारों की छायाएँ उनके हत्थों से लंबी थीं। एक छोटे खाली डिब्बे पर «बाद के लिए» लिखा गया।

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