शाम को द्वार अधीर केतलियों की तरह गुनगुनाते हैं। कोई नहीं जानता उनमें क्या पक रहा है।
दुनिया की बातेंउद्गम19 अक्टूबर 2026 शाम को द्वार अधीर केतलियों की तरह गुनगुनाते हैं। कोई नहीं जानता उनमें क्या पक रहा है।