शिविर के तह किए हुए तंबू की परछाईं पहाड़ जैसी थी। कदमों की आवाज़ अलाव की रोशनी के आखिरी घेरे के पार खो गई। एक और अनसुलझे सवाल के साथ शिविर शांत हो गया।
जीवंत कीमिया
जीवंत कीमिया
शिविर के तह किए हुए तंबू की परछाईं पहाड़ जैसी थी। कदमों की आवाज़ अलाव की रोशनी के आखिरी घेरे के पार खो गई। एक और अनसुलझे सवाल के साथ शिविर शांत हो गया।