व्यापारी का तराज़ू हाथ से लिखे वादे की ओर झुक गया। एक सिक्का ठीक अपने मालिक की हथेली में लौट आया। बाज़ार को थोड़ी देर और खुला रहने का कारण मिल गया।
जीवंत कीमिया
जीवंत कीमिया
व्यापारी का तराज़ू हाथ से लिखे वादे की ओर झुक गया। एक सिक्का ठीक अपने मालिक की हथेली में लौट आया। बाज़ार को थोड़ी देर और खुला रहने का कारण मिल गया।